अनुवाद [27]
English
- Bhikkhu Bodhi (2009)
- Bhikkhu Sujato
- Bhikkhuni Upalavanna
繁體字
- 莊春江
日本語
- 関西パーリ語実習会 (2023)
Français
- Môhan Wijayaratna (2010)
Deutsch
- Mettiko Bhikkhu (2001)
- Sabbamitta (2019)
Italiano
- De Lorenzo, Pier Antonio Morniroli, Enrico Federici (2007)
- Giovanni Zappa (2025)
Español
- Anton P. Baron
Català
- Albert Biayna Gea
Português
- Michael Beisert (2014)
Русский
- SV theravada.ru (2023)
Norsk
- Kåre A. Lie (2013)
Magyar
- Fenyvesi Róbert (2009)
Srpski
- Branislav Kovačević (2014)
Čeština
- Štěpán Chromovský
Slovenščina
- Bojan Božič (2023)
हिंदी
- Rahul Sankrityayan
বাংলা
- বিনয়েন্দ্রনাথ চৌধুরী
Việt Ngữ
- Thích Minh Châu
Bahasa Indonesia
- Indra Anggara
සිංහල
- A.P. de Zoysa
ပြန်သွားရန်
- Pitaka Myanmar Translation
ภาษาไทย
- Siam Rath
पाळिभासा (Pāli)
- Mahāsaṅgīti Tipiṭaka
संदर्भ
- Sutta Central
चूल-राहुलोवाद-सुत्तन्त
ऐसा मैंने सुना —
एक समय भगवान् श्रावस्ती में अनाथ-पिंडिक के आराम जेतवन में विहार करते थे।
तब एकान्त में ध्यानावस्थित भगवान् को यह हुआ—
“राहुल को विमुक्ति (=मुक्ति) के लिये परिपाक होने लायक धर्म (=विचार) परिपक्व हो गये हैं; क्यों न मैं राहुल को आगे आस्रवों (=चित्त-मलों) के क्षय की ओर ले चलूँ।”
“तब भगवान् पूर्वाह्न-समय पहिन कर, पात्र-चीवर ले श्रावस्ती में पिंड (=भिक्षा) के लिये प्रविष्ट हुये। श्रावस्ती में भिक्षाटन कर भोजनोपरान्त, भिक्षा से निबट कर आयुष्मान् राहुल को संबोधित किया—
“राहुल! आसन (=निषीदन) को लो, दिन के विहार के लिये जहाँ अन्धवन हैं, वहाँ चलेंगे।”
“अच्छा, भन्ते!” (कह) आयुष्मान् राहुल ने भगवान् को उत्तर दे, आसन ले भगवान् के पीछे पीछे चले।
उस समय अनेक शत-सहस्र (=लाख) देवता भगवान् का—‘आज भगवान् आयुष्मान् राहुल को आगे आस्रवों के क्षय की ओर ले चलेंगे’—(सोच) भगवान् का अनुगमन कर रहे थे।
तब भगवान् अन्धवन में प्रविष्ट हो एक वृक्ष के नीचे बिछे आसन पर बैठे। आयुष्मान् राहुल भी भगवान् को अभिवादन कर एक ओर बैठ गये। एक ओर बैठे आयुष्मान् राहुल से भगवान् ने यह कहा—
“तो क्या मानता है, राहुल! चक्षु (=आँख) नित्य हैं, या अ-नित्य?”
“अ-नित्य है, भन्ते!”
“जो, अनित्य हैं, वह दुःख है या सुख?”
“दुःख, भन्ते!”
“जो अनित्य, दुःख, विपरिणाम-धर्मा है, क्या उसे—‘यह मैं हूँ’, ‘यह मेरा हैं’, ‘यह मेरा आत्मा है’—ऐसा समझना युक्त हैं?”
“नहीं, भन्ते!”
॰ रूप ॰। ॰ चक्षुर्विज्ञान ॰। ॰ चक्षु-संस्पर्श ॰। ॰ जो चक्षु-संस्पर्श के कारण उत्पन्न वेदना-संज्ञा- संस्कार-विज्ञान विषयक (ज्ञान) ॰।
॰ श्रोत्र ॰। ॰ इन शब्द ॰। ॰ श्रोत्र-विज्ञान ॰। ॰ श्रोत्र-संस्पर्श ॰। ॰ जो श्रोत्र संस्पर्श के कारण उत्पन्न वेदना ॰।
॰ घ्राण ॰। ॰ गंध ॰। ॰ घ्राण-विज्ञान ॰। ॰ घ्राण-संस्पर्श ॰। ॰ जो घ्राण-संस्पर्श के कारण उत्पन्न वेदना ॰।
॰ जिह्वा ॰। ॰ रस ॰। ॰ जिह्वा-विज्ञान ॰। ॰ जिह्वा-संस्पर्श ॰। ॰ जो जिह्वा-संस्पर्श के कारण उत्पन्न वेदना ॰।
॰ काय .॰। ॰ स्प्रष्टव्य ॰। ॰ काय-विज्ञान ॰। ॰ काय-संस्पर्श ॰। ॰ जो काय-संस्पर्श े कारण उत्पन्न वेदना ॰।
॰ मन ॰। ॰ धर्म ॰। ॰ मनो-विज्ञान ॰। ॰ मनः-संस्पर्श ॰। ॰ जो मनः-संस्पर्श के कारण उत्पन्न वेदना-संज्ञा-संस्कार-विज्ञान-विषयक (ज्ञान) ॰।
“राहुल! इस प्रकार देखते श्रुतवान् (=बहुश्रुत) आर्य-श्रावक चक्षु में निर्वेद (=उदासीनता) को प्राप्त होता है। रूप ॰। चक्षु-र्विज्ञान ॰। चक्षुःसंस्पर्श ॰। चक्षुःसंस्पर्श के कारण उत्पन्न वेदना-संज्ञा-संस्कार-विज्ञान विषयक (ज्ञान) से निर्वेद को प्राप्त होता है;
॰ श्रोत्र ॰। शब्द ॰। श्रोत्र-विज्ञान ॰। श्रोत्र-संस्पर्श ॰। श्रोत्र-संस्पर्श के कारण उत्पन्न वेदना-संज्ञा-संस्कार-विज्ञान विषयक (ज्ञान) ॰।
॰ घ्राण ॰। गंध ॰। घ्राण-विज्ञान ॰। घ्राण-स्पर्श ॰।॰ जो घ्राण-संस्पर्श के कारण उत्पन्न वेदना ॰ ॰।
॰ जिह्वा ॰। रस ॰। जिह्वा-विज्ञान ॰। जिह्वा-संस्पर्श ॰। जो जिह्वा-संस्पर्श के कारण उत्पन्न वेदना ॰ ॰।
॰ काय .॰। स्प्रष्टव्य ॰। काय-विज्ञान ॰। काय-संस्पर्श ॰। जो काय-संस्पर्श के कारण उत्पन्न वेदना ॰ ॰।
॰ मन ॰। धर्म ॰। मनो-विज्ञान ॰। मनःसंस्पर्श ॰। मनः-संस्पर्श के कारण उत्पन्न वेदना-संज्ञा-संस्कार-विज्ञान विषयक (ज्ञान) से निर्वेद को प्राप्त होता है। निर्वेदकों को प्राप्त हो विरक्त होता है। विराग होने से विमुक्त होता है। विमुक्त (=मुक्त) होने पर ‘विमुक्त हूँ’—ज्ञान होता है; (फिर) ‘जन्म (=आवागमन) नष्ट हो गया, ब्रह्मचर्यवास खतम हो गया, करणीय किया जा चुका; और अब यहाँ करने को (शेष) नहीं’—यह जानता है।”
भगवान् ने यह कहा, सन्तुष्ट हो आयुष्मान् राहुल ने भगवान् के भाषण को अभिनंदित किया।
इस व्याकरण (=उपदेश) के कहे जाते समय आयुष्मान् राहुल का चित्त, उपादान (=ग्रहण) न कर, आस्रवों (=जन्म मरण के कारण भूत चित्त-मल) से युक्त हो गया। और उन अनेक शत-सहस्र देवताओं को विरज=निर्मल धर्म चक्षु—‘जो कुछ उत्पन्न होता है, वह नाश होता हैं’—उत्पन्न हुआ।
अनुवाद [27]
English
- Bhikkhu Bodhi (2009)
- Bhikkhu Sujato
- Bhikkhuni Upalavanna
繁體字
- 莊春江
日本語
- 関西パーリ語実習会 (2023)
Français
- Môhan Wijayaratna (2010)
Deutsch
- Mettiko Bhikkhu (2001)
- Sabbamitta (2019)
Italiano
- De Lorenzo, Pier Antonio Morniroli, Enrico Federici (2007)
- Giovanni Zappa (2025)
Español
- Anton P. Baron
Català
- Albert Biayna Gea
Português
- Michael Beisert (2014)
Русский
- SV theravada.ru (2023)
Norsk
- Kåre A. Lie (2013)
Magyar
- Fenyvesi Róbert (2009)
Srpski
- Branislav Kovačević (2014)
Čeština
- Štěpán Chromovský
Slovenščina
- Bojan Božič (2023)
हिंदी
- Rahul Sankrityayan
বাংলা
- বিনয়েন্দ্রনাথ চৌধুরী
Việt Ngữ
- Thích Minh Châu
Bahasa Indonesia
- Indra Anggara
සිංහල
- A.P. de Zoysa
ပြန်သွားရန်
- Pitaka Myanmar Translation
ภาษาไทย
- Siam Rath
पाळिभासा (Pāli)
- Mahāsaṅgīti Tipiṭaka
संदर्भ
- Sutta Central
चूल-राहुलोवाद-सुत्तन्त
टीकाएँ [3]
English
Việt Ngữ